लोन लेने से पहले ऐसे जानें कि आप EMI समय पर चुका पाएंगे या नहीं
कई लोग लोन लेते समय केवल इस बात पर ध्यान देते हैं कि बैंक कितना लोन दे रहा है या हर महीने कितनी EMI बनेगी। लेकिन असली सवाल यह नहीं होता कि बैंक आपको लोन देगा या नहीं… असली सवाल यह होता है कि क्या आप आने वाले कई महीनों या वर्षों तक उस EMI को बिना तनाव के समय पर चुका पाएंगे?
शुरुआत में EMI छोटी और आसान लग सकती है, लेकिन जब हर महीने सैलरी का बड़ा हिस्सा EMI में जाने लगता है तब धीरे-धीरे आर्थिक दबाव बढ़ने लगता है। कई लोग बाद में EMI भरने में परेशानी का सामना करते हैं, बचत खत्म हो जाती है और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी पैसे कम पड़ने लगते हैं।
इसलिए किसी भी तरह का लोन लेने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि आपकी वर्तमान आय, खर्च और भविष्य की स्थिति उस EMI को संभाल पाएगी या नहीं। सही लोन EMI प्लानिंग आपको कर्ज के जाल से बचा सकती है और आपकी आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रख सकती है।
लोन लेने से पहले सबसे पहले खुद से ये पूछें
कई बार लोग सिर्फ इस वजह से लोन ले लेते हैं क्योंकि उनके आसपास के लोग भी लोन लेकर घर, गाड़ी या दूसरी चीजें खरीद रहे होते हैं। वहीं कुछ लोग अचानक आई जरूरत या जल्दबाजी में बिना ज्यादा सोच-विचार किए लोन अप्लाइ कर देते हैं। लेकिन बाद में जब हर महीने EMI का दबाव बढ़ने लगता है तब उन्हें एहसास होता है कि सही planning कितनी जरूरी थी।
असल में लोन लेना आसान हो सकता है, लेकिन उसे लंबे समय तक आराम से चुकाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसलिए लोन लेने से पहले क्या करें, इसका सबसे सही जवाब यही है कि पहले अपनी आर्थिक स्थिति को पूरी ईमानदारी से समझें। केवल बैंक की eligibility देखकर फैसला लेना समझदारी नहीं है। आपको यह भी देखना चाहिए कि आपकी income, savings और future stability उस EMI को संभाल पाएगी या नहीं।
लोन लेने से पहले खुद से ये जरूरी सवाल जरूर पूछें:
- क्या मेरी आय स्थिर है?
- क्या मेरी नौकरी सुरक्षित है?
- क्या मेरे पास emergency fund है?
- क्या मेरी वर्तमान जिम्मेदारियां ज्यादा हैं?
- क्या भविष्य में आय कम होने का खतरा है?
- क्या मैं बिना तनाव के हर महीने EMI समय पर भर पाऊंगा?
यदि इन सवालों का जवाब स्पष्ट नहीं है, तो तुरंत बड़ा लोन लेना भविष्य में आर्थिक दबाव और तनाव का कारण बन सकता है।
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EMI चुकाने की क्षमता कैसे जानें
अक्सर लोग पूछते हैं — “क्या मैं EMI समय पर चुका पाऊंगा?” लेकिन इस सवाल का सही जवाब केवल आपकी सैलरी नहीं देती। कई बार अच्छी income होने के बावजूद लोग EMI भरने में परेशानी का सामना करने लगते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी आर्थिक स्थिति को सही तरीके से नहीं समझा होता। इसलिए किसी भी loan से पहले यह जानना जरूरी है कि आपकी income, expenses, savings और future stability उस EMI को लंबे समय तक संभाल पाएगी या नहीं।
EMI चुकाने की क्षमता जानने के लिए इन बातों पर जरूर ध्यान दें:
1. हर महीने की कुल आय देखें
सबसे पहले अपनी कुल monthly income को स्पष्ट रूप से लिखें। यदि आपकी कमाई नौकरी, business, freelance या किराए जैसी कई जगहों से आती है, तो सभी income को जोड़ें। लेकिन EMI planning करते समय केवल स्थिर और भरोसेमंद income को ही आधार मानें। अस्थायी या कभी-कभी मिलने वाली income पर भरोसा करके बड़ी EMI लेना भविष्य में जोखिम बढ़ा सकता है।
2. सभी जरूरी खर्च लिखें
लोन लेने से पहले इनकम और खर्च कैसे देखें — यह सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। केवल इनकम देखना काफी नहीं होता, क्योंकि असली स्थिति खर्चों से समझ आती है। अपने हर महीने के जरूरी खर्चों की सूची बनाएं, जैसे:
- घर का खर्च
- किराया
- बच्चों की पढ़ाई
- बिजली-पानी
- बीमा
- यात्रा खर्च
- मोबाइल और इंटरनेट
- मेडिकल खर्च
- निवेश और बचत
अब देखें कि इन सभी खर्चों के बाद वास्तव में कितना पैसा बचता है। यदि बची हुई राशि बहुत कम है, तो बड़ी EMI लेना financial pressure बढ़ा सकता है।
3. Emergency Fund जरूर देखें
यदि आपके पास कम से कम 4 से 6 महीने के खर्च और EMI जितना emergency fund नहीं है, तो बड़ा लोन लेना जोखिम भरा हो सकता है। जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं चलती। कभी नौकरी जाने, बीमारी आने या business slowdown जैसी परिस्थितियां अचानक आ सकती हैं। ऐसे समय में emergency fund ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा बनता है और EMI भरने में परेशानी से बचाता है।
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सैलरी के हिसाब से लोन कितना लेना सही रहता है?
बहुत लोग यह गलती कर देते हैं कि बैंक जितना लोन approve कर देता है, उतना पूरा लोन ले लेते हैं। लेकिन समझदारी इसी में है कि लोन आपकी आय और लाइफस्टाइल के हिसाब से हो। यदि EMI आपकी monthly income का बहुत बड़ा हिस्सा बन जाती है, तो भविष्य में savings, emergency expenses और बाकी जरूरी जरूरतों को संभालना मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से financial experts अक्सर सलाह देते हैं कि आपकी कुल EMI monthly income के लगभग 30% से 40% के बीच ही रहनी चाहिए। इससे आप पर अनावश्यक आर्थिक दबाव नहीं बनता और भविष्य की financial planning भी बेहतर तरीके से चलती रहती है।
| Monthly Income | सुरक्षित EMI |
|---|---|
| ₹25,000 | ₹7,000 – ₹8,000 |
| ₹40,000 | ₹12,000 – ₹15,000 |
| ₹60,000 | ₹18,000 – ₹24,000 |
| ₹1,00,000 | ₹30,000 – ₹40,000 |
यदि आपकी EMI इनकम का बहुत बड़ा हिस्सा बन जाती है, तो धीरे-धीरे आर्थिक तनाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में savings करना मुश्किल हो जाता है, emergency आने पर परेशानी बढ़ सकती है और future financial goals भी प्रभावित होने लगते हैं। इसलिए हमेशा उतना ही loan लें जिसकी EMI आप आराम से संभाल सकें।
ज्यादा ईएमआई होने से क्या समस्याएं हो सकती हैं?
शुरुआत में बड़ी EMI manageable लग सकती है, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर आपकी पूरी financial life पर दिखने लगता है। जब income का बड़ा हिस्सा हर महीने loan repayment में जाने लगता है, तो savings, investments और daily expenses को balance करना मुश्किल हो जाता है। लगातार financial pressure रहने से भविष्य की planning भी प्रभावित होने लगती है।
1. बचत खत्म होने लगती है
जब salary का बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है, तो हर महीने savings करना मुश्किल हो जाता है। धीरे-धीरे emergency fund बनना बंद हो जाता है और भविष्य के लिए पैसा बचाना कठिन हो जाता है। इससे financial security कमजोर पड़ने लगती है।
2. मानसिक तनाव बढ़ता है
हर महीने EMI भरने का लगातार pressure मानसिक तनाव बढ़ा सकता है। यदि income में थोड़ी भी समस्या आती है, तो payment की चिंता बढ़ने लगती है। लंबे समय तक यह तनाव व्यक्ति की financial confidence और मानसिक शांति दोनों को प्रभावित कर सकता है।
3. Emergency में परेशानी
अचानक बीमारी, नौकरी जाने या किसी जरूरी खर्च की स्थिति में ज्यादा EMI बड़ी समस्या बन सकती है। क्योंकि monthly income का अधिक हिस्सा पहले से loan repayment में जा रहा होता है, इसलिए emergency situation को संभालने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बचता।
4. निवेश रुक जाता है
जब income का बड़ा हिस्सा EMI में खर्च होने लगता है, तो investments और wealth creation की planning पीछे छूटने लगती है। SIP, mutual funds या retirement planning जैसे जरूरी financial goals पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।
5. Debt Cycle शुरू हो सकता है
कई लोग पुरानी EMI भरने के लिए नया loan या credit card इस्तेमाल करने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत debt cycle में बदल सकती है, जहाँ व्यक्ति एक loan चुकाने के लिए दूसरा loan लेने पर मजबूर हो जाता है।
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अपनी EMI कैसे मैनेज करें?
बहुत लोग loan लेते समय केवल EMI amount पर ध्यान देते हैं, लेकिन लंबे समय तक उसे सही तरीके से manage करना भी उतना ही जरूरी होता है। शुरुआत में EMI भरना आसान लगता है, लेकिन समय के साथ expenses बढ़ने पर financial pressure महसूस होने लगता है। यदि पहले से सही planning की जाए, तो EMI को बिना तनाव के आसानी से संभाला जा सकता है।
1. EMI Date सैलरी के बाद रखें
हमेशा ऐसी EMI date चुनें जब आपके account में salary आ चुकी हो। इससे account balance कम होने की समस्या नहीं आती और EMI bounce होने का खतरा भी घट जाता है। सही date चुनने से monthly budget manage करना काफी आसान हो जाता है।
2. Auto Debit चालू करें
Auto debit सुविधा चालू करने से हर महीने EMI अपने आप account से कट जाती है। इससे payment भूलने की संभावना कम होती है और late payment charges या खराब credit score जैसी समस्याओं से बचाव होता है। यह तरीका discipline बनाए रखने में भी मदद करता है।
3. गैर जरूरी खर्च कम करें
यदि आपकी income का बड़ा हिस्सा EMI में जा रहा है, तो unnecessary shopping, luxury खर्च और impulsive buying को कम करना जरूरी है। छोटे-छोटे खर्चों पर control रखने से हर महीने budget बेहतर रहता है और EMI भरने में financial stress कम महसूस होता है।
4. छोटा emergency backup रखें
कम से कम 2-3 EMI जितना emergency fund account में रखना समझदारी होती है। इससे अचानक नौकरी जाने, medical emergency या income रुकने जैसी स्थिति में भी EMI समय पर भरने में मदद मिलती है और loan default का खतरा कम होता है।
5. एक साथ कई लोन ना लें
एक समय में बहुत सारे loans लेने से financial pressure तेजी से बढ़ सकता है। कई EMI होने पर monthly budget बिगड़ने लगता है और savings करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए उतना ही loan लें जिसे आपकी income आराम से संभाल सके।
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EMI भरने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
EMI calculation tips को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि केवल छोटी monthly EMI देखकर लोनलेना सही फैसला नहीं होता। हमेशा यह देखें कि loan पर ब्याज दर कितनी लग रही है और पूरे समय में कुल repayment कितना होगा। कई बैंक processing fee, insurance और दूसरे charges भी जोड़ देते हैं, जिससे loan महंगा हो सकता है। इसके साथ ही यह समझना जरूरी है कि ब्याज fixed है या floating, क्योंकि floating interest future में बढ़ भी सकता है। late payment penalty की जानकारी भी पहले से होनी चाहिए। कई बार बैंक EMI कम दिखाने के लिए tenure बहुत लंबा कर देते हैं, जिससे कुल ब्याज काफी ज्यादा चुकाना पड़ता है। इसलिए loan लेने से पहले हर शर्त को ध्यान से समझना जरूरी है।
EMI भरने में परेशानी क्यों शुरू होती है?
अधिकतर लोगों की financial problems अचानक नहीं आतीं, बल्कि धीरे-धीरे शुरू होती हैं। शुरुआत में EMI आसानी से manage हो जाती है, लेकिन समय के साथ income और expenses का balance बिगड़ने लगता है। कई बार लोग अपनी वास्तविक financial capacity को समझे बिना बड़ा loan ले लेते हैं, जिसका असर बाद में दिखाई देता है। यदि सही planning ना हो, तो छोटी-छोटी financial गलतियाँ भी बड़े तनाव का कारण बन सकती हैं।
- इनकम कम होना
- नौकरी जाना
- ज्यादा खर्च बढ़ जाना
- बिना planning के loan लेना
- एक साथ कई lलोन लेना
- emergency savings ना होना
- credit card पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना
- monthly budget सही तरीके से manage ना करना
इसीलिए loan लेने से पहले अपनी financial condition, income stability और future expenses को अच्छी तरह समझना बहुत जरूरी है। सही planning ही EMI burden को लंबे समय तक control में रखने में मदद करती है।
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EMI ना भर पाने पर क्या होता है?
बहुत लोग यह सोचते हैं कि एक EMI miss होने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन धीरे-धीरे यही छोटी गलती बड़ी financial समस्या बन सकती है। जब EMI समय पर नहीं भरी जाती, तो बैंक या finance company अतिरिक्त charges लगाना शुरू कर देती है। लगातार payment delay होने पर इसका असर आपके credit history और future financial opportunities पर भी पड़ सकता है। इसलिए EMI को हमेशा समय पर भरने की कोशिश करनी चाहिए।
संभावित नुकसान:
- Late payment charges लग सकते हैं
- penalty interest बढ़ सकता है
- CIBIL score खराब हो सकता है
- future में loan approval मिलने में दिक्कत आ सकती है
- recovery calls और लगातार follow-up शुरू हो सकते हैं
- मानसिक तनाव और financial pressure बढ़ सकता है
- credit card या दूसरे लोन की eligibility कम हो सकती है
- लंबे समय तक EMI ना भरने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है
इसीलिए loan लेने से पहले EMI amount और repayment capacity को अच्छी तरह समझना बहुत जरूरी होता है।
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लोन लेने से पहले बजट प्लानिंग क्यों जरूरी है?
Loan EMI planning तभी सफल होती है जब आपके पास अपनी income और expenses का साफ हिसाब हो। कई लोग केवल bank eligibility देखकर loan ले लेते हैं, लेकिन बाद में monthly budget बिगड़ने लगता है। सही budget planning यह समझने में मदद करती है कि आपकी income का कितना हिस्सा सुरक्षित रूप से EMI में जा सकता है और कितना पैसा बाकी जरूरतों के लिए बचना चाहिए।
1. कितना खर्च जरूरी है
Budget planning से आपको यह समझ आता है कि हर महीने किन खर्चों को टालना संभव नहीं है। जैसे घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, बिजली bill, किराया और medical जरूरतें। इससे loan लेने के बाद भी जरूरी expenses आराम से manage किए जा सकते हैं।
2. कितना बचाया जा सकता है
सही budget यह बताता है कि monthly income में से कितना पैसा savings और emergency fund के लिए अलग रखा जा सकता है। यदि पूरा पैसा EMI और खर्चों में चला जाए, तो future financial security कमजोर हो सकती है। इसलिए savings के लिए जगह बचाना जरूरी होता है।
3. कितनी EMI सुरक्षित रहेगी
Budget planning यह तय करने में मदद करती है कि आपकी income के हिसाब से कितनी EMI वास्तव में सुरक्षित है। इससे जरूरत से ज्यादा loan लेने से बचाव होता है और monthly financial pressure भी कम रहता है। सही EMI balance financial stability बनाए रखने में मदद करता है।
4. Future goals कैसे पूरे होंगे
यदि बजट पहले से planned हो, तो लोन लेने के बाद भी investment, retirement planning, बच्चों की education और दूसरे financial goals पर असर कम पड़ता है। इससे व्यक्ति केवल EMI भरने तक सीमित नहीं रहता बल्कि future wealth creation पर भी ध्यान दे पाता है।
बिना budget planning के लिया गया loan कई बार धीरे-धीरे financial burden बन जाता है। इसलिए loan लेने से पहले इनकम और expenses का सही analysis करना बेहद जरूरी है।
पर्सनल लोन लेने से पहले क्या सोचें?
पर्सनल लोन जल्दी मिल जाता है, इसलिए बहुत लोग बिना ज्यादा सोच-विचार के इसे ले लेते हैं। लेकिन यह सबसे महंगे लोन में से एक माना जाता है। लोन लेने से पहले यह जरूर समझें कि वह वास्तव में जरूरत है या केवल इच्छा। साथ ही यह भी देखें कि उसकी मासिक किस्त आपकी आय पर कितना दबाव डालेगी और भविष्य में आमदनी स्थिर रहेगी या नहीं। यदि कोई सस्ता विकल्प उपलब्ध हो तो पहले उसे समझना चाहिए। छोटी जरूरतों के लिए बड़ा ऋण लेना आगे चलकर बड़ी आर्थिक गलती साबित हो सकता है।
लोन रीपेमेंट प्लानिंग कैसे करें?
Loan लेना जितना महत्वपूर्ण फैसला होता है, उससे भी ज्यादा जरूरी उसकी सही repayment planning होती है। यदि शुरुआत से सही strategy बनाई जाए, तो EMI का दबाव काफी कम किया जा सकता है। अच्छी repayment planning न केवल financial stress घटाती है बल्कि loan को जल्दी खत्म करने और future financial stability बनाए रखने में भी मदद करती है।
1. आय बढ़ने पर अतिरिक्त पेमेंट करें
जब आपकी salary या income बढ़े, तो उसका कुछ हिस्सा loan prepayment में लगाने की कोशिश करें। इससे principal amount जल्दी कम होने लगता है और कुल ब्याज का बोझ भी घट जाता है। छोटी-छोटी अतिरिक्त payments भी लंबे समय में बड़ा फायदा दे सकती हैं।
2. Bonus का उपयोग लोन कम करने में करें
बहुत लोग bonus या extra income मिलते ही unnecessary shopping या luxury खर्च करने लगते हैं। लेकिन यदि उस पैसे का कुछ हिस्सा loan repayment में लगाया जाए, तो EMI burden तेजी से कम हो सकता है और loan tenure भी छोटा हो सकता है।
3. बेवजह कर्ज बंद करें
यदि पहले से होम लोन या किसी बड़े अन्य लोन की EMI चल रही है, तो unnecessary credit card debt और पर्सनल लोन लेने से बचना चाहिए। एक साथ कई debts होने पर financial pressure बढ़ जाता है और monthly budget manage करना मुश्किल हो सकता है।
4. Insurance protection रखें
घर के मुख्य कमाने वाले व्यक्ति के लिए insurance protection बहुत जरूरी होता है। अचानक किसी अनहोनी या income रुकने की स्थिति में insurance परिवार को financial support देता है, जिससे EMI burden पूरी तरह परिवार पर नहीं आता और financial stability बनी रहती है।
कौन लोग बड़ा लोन लेने से बचें?
हर व्यक्ति के लिए बड़ा loan लेना सही फैसला नहीं होता। यदि आपकी income स्थिर नहीं है या financial condition मजबूत नहीं है, तो ज्यादा loan भविष्य में बड़ा burden बन सकता है। ऐसी स्थिति में पहले savings, emergency fund और income stability पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी होता है, ताकि आगे चलकर EMI का दबाव financial stress में ना बदल जाए।
- अस्थिर आय होना
- नई नौकरी होना
- business uncertainty
- पहले से कई EMI होना
- emergency fund ना होना
- बहुत कम सेविंग होना
फाइनेंशियल समझ ही सबसे बड़ी सुरक्षा है
कई लोग ज्यादा इनकम होने के बावजूद financial stress में रहते हैं क्योंकि उन्होंने बिना प्लानिंग के लोन ले रखे होते हैं। वहीं कुछ लोग कम इनकम में भी financially stable रहते हैं क्योंकि वे जिम्मेदारी से borrowing करते हैं।
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निष्कर्ष (Conclusion):
लोन लेना गलत नहीं है, लेकिन बिना अपनी क्षमता समझे लोन लेना भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकता है। इसलिए किसी भी लोन से पहले यह जरूर जांचें कि आपकी income, savings और lifestyle उस EMI को लंबे समय तक संभाल पाएंगे या नहीं।
बैंक का loan approve करना और आपकी financial capacity — दोनों अलग बातें हैं।
सही financial decision वही है जो आपकी जिंदगी को आसान बनाए, मुश्किल नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Q&A)
सैलरी का कितना प्रतिशत ईएमआई होना चाहिए?
सामान्य तौर पर कुल ईएमआई मासिक आय के लगभग 30% से 40% तक सुरक्षित मानी जाती है। इससे रोजमर्रा के खर्च, बचत और भविष्य की आर्थिक योजनाओं को संभालना आसान रहता है। इससे ज्यादा ईएमआई होने पर धीरे-धीरे आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
ईएमआई समय पर कैसे भरें?
ईएमआई समय पर भरने के लिए मासिक बजट बनाना बहुत जरूरी है। खाते में पर्याप्त पैसा बनाए रखें, स्वचालित भुगतान सुविधा चालू करें और गैर जरूरी खर्च कम करें। साथ ही छोटा आपातकालीन फंड रखने से अचानक समस्या आने पर भी ईएमआई संभालना आसान रहता है।
ज्यादा ईएमआई होने के नुकसान क्या हैं?
यदि आय का बड़ा हिस्सा ईएमआई में चला जाए, तो बचत कम होने लगती है और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। भविष्य के निवेश और आर्थिक लक्ष्य भी प्रभावित होने लगते हैं। कई बार व्यक्ति केवल कर्ज चुकाने में ही उलझ जाता है।
ईएमआई मिस होने पर क्या होता है?
ईएमआई समय पर ना भरने पर अतिरिक्त शुल्क और जुर्माना लग सकता है। लगातार देरी होने पर ऋण रिकॉर्ड खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में नया ऋण मिलने में परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक भुगतान ना करने पर कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
पर्सनल लोन लेने से पहले क्या सोचें?
सबसे पहले यह समझें कि ऋण वास्तव में जरूरी है या नहीं। इसके बाद देखें कि उसकी मासिक किस्त आपकी आय पर कितना दबाव डालेगी। बिना जरूरत केवल इच्छाएं पूरी करने के लिए बड़ा ऋण लेना भविष्य में परेशानी बढ़ा सकता है।
क्या आपातकालीन फंड होने के बाद ही ऋण लेना चाहिए?
हाँ, आपातकालीन फंड होने से अचानक नौकरी जाने, बीमारी या आय रुकने जैसी स्थिति में भी ईएमआई भरना आसान हो जाता है। इससे आर्थिक तनाव कम रहता है और ऋण चूकने का खतरा भी घटता है।
क्या एक साथ कई ऋण लेना सही है?
यदि आय बहुत मजबूत ना हो, तो कई ऋण एक साथ लेना आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। कई किस्तें होने पर मासिक बजट बिगड़ सकता है और बचत करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए उतना ही ऋण लें जिसे आसानी से संभाला जा सके।
