इंडिया में बिटकॉइन लीगल हैं या नहीं, भारत में बिटकॉइन का भविष्य 2022, भारत में क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य 2025
भारत में बिटकॉइन का भविष्य 2022

बिटकॉइन इंडिया में लीगल है या नहीं यह सवाल हर निवेशक के मन में रहता है जो बिटकॉइन में निवेश करना चाहता है या जिन्होंने बिटकॉइन में निवेश किया हुआ है।
यदि आप भी बिटकॉइन या किसी अन्य क्रिप्टोकरेंसी मे निवेश कर रहे हैं या निवेश करना चाहते हैं तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी होगा कि आखिर बिटकॉइन या क्रिप्टोकरेंसी भारत में मान्य है या नहीं।

क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना बहुत ज्यादा जोखिम भरा रहता हैं। फिर भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेशकों की तादाद दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। भारत में भी पिछले कुछ दिनों में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालो की संख्या में काफी इजाफा हुआ हैं। जिसको देखते हुए क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने की जरूरत हैं।
हालांकि सरकार ने वर्चुअल एसेट से होने वाली आय पर टैक्स लगाकर क्रिप्टोकरेंसी में निवेशकों को एक ग्रीन सिग्नल दिया है। फिर भी आने वाले समय में क्रिप्टोकरेंसी के लिए कुछ कह पाना मुश्किल है।

बिटकॉइन इंडिया में लीगल हैं या नहीं

भारतीय निवेशक बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी मे बढ़ी तादाद में निवेश करते हैं। विश्वभर में देखा जाए तो क्रिप्टोकरेंसी में सबसे ज्यादा निवेशक भारतीय हैं। भारतीय निवेशकों की संख्या लगभग 10 करोड के आसपास हैं। जो विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी में लगभग 70 हजार करोड़ रुपए निवेश किए हुए हैं।
इतनी बढ़ी रकम को देखते हुए सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध नहीं लगा सकती है। क्योंकि यदि भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया जाए तो लगभग 70 हजार करोड़ रुपए निवेशकों को मिलना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसलिए सरकार इसे वर्चुअल एसेट का नाम देकर टैक्स के दायरे में लेकर आईं हैं।
और कहां जा सकता हैं कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जारी रहेगा। या कहें की बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी निवेश के लिए मान्य हैं।
हालांकि इसके बाद भी इंडिया में बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहेगी।

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भारत में बिटकॉइन का भविष्य 2022

भारत में बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य को लेकर कुछ कह पाना थोड़ा मुश्किल है मगर सरकार व आरबीआई की तरफ से उठाए गए कदमों के आधार पर भारत में बिटकॉइन के भविष्य की कल्पना कर सकते है। जैसे- क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर टैक्स लागू करना, क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक सकारात्मक कदम माना जा सकता हैं। वहीं क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए केवाईसी जरूरी करना। इसके साथ ही आरबीआई अपनी डिजिटल करेंसी लेकर आने वाली है। इन सभी को देखते हुए इंडिया में डिजिटल करेंसी व क्रिप्टोकरेंसी के लिए अच्छा सिग्नल माना जा सकता हैं।

क्रिप्टोकरेंसी आय पर लगेगा टैक्स

भारतीय वित्तीय विभाग की तरफ से साफ तौर पर कहा गया है कि वर्चुअल डिजिटल एसेट से होने वाली कमाई का 30 प्रतिशत टैक्स के रूप में सरकार को देना होगा।
सरकार क्रिप्टोकरेंसी को करेंसी नही मानती हैं। इसलिए इसे वर्चुअल डिजिटल एसेट का नाम दिया गया है। वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिहाज से देखा जाए तो क्रिप्टोकरेंसी में बहुत बड़े पैमाने पर निवेशक अपनी रकम निवेश करते हैं।
क्रिप्टोकरेंसी से आय पर टैक्स को क्रिप्टोकरेंसी रेगुलेट करने के लिए बड़ा कदम माना जा सकता है। क्योंकि भारत में अबतक क्रिप्टोकरंसी पर किसी तरह का टैक्स नहीं देना होता था। इसी वजह से इसे लेकर निवेशकों के मन में एक अनिश्चितता थी कि क्रिप्टोकरेंसी देश में निवेश के लिए जारी रहेगी या इस पर प्रतिबंध लगेगा।
क्रिप्टोकरेंसी की आय पर टैक्स लागू होने से कहा जा सकता हैं कि आने वाले समय में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना पहले की तुलना में सुरक्षित होगा।
इस कदम ने निवेशकों के मन से एक दुविधा को दूर किया हैं। कि आखिर बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी भारत में निवेश के लिए जारी रहेगी।

ट्रांसफर करने पर लगेगा टीडीएस

क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली इनकम पर ही नहीं बल्कि क्रिप्टोकरेंसी खरीदने या बेचने के लिए होने वाले ट्रांजेक्शन पर भी 1 प्रतिशत टीडीएस देना होगा। किसी अन्य व्यक्ति को क्रिप्टोकरेंसी या वर्चुअल एसेट गिफ्ट करने पर भी टीडीएस देना होगा। इस तरह अगर देखा जाए तो भारत में बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी लीगल मानी जा सकती हैं। मगर सरकार क्रिप्टोकरेंसी को कोई करेंसी नही मानती हैं बल्कि इसे वर्चुअल डिजिटल एसेट मानती हैं। जो आय का साधन बना हुआ हैं।

क्या हैं टैक्स के मायने?

सरकार जब भी किसी विशेष कार्य के लिए टैक्स लागू करती है तो माना जा सकता हैं कि वह कार्य वैध है अन्यथा उस पर रोक लगा दी जाती है। ऐसा ही क्रिप्टोकरेंसी को लेकर हुआ है। यदि भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाना चाहती तो फिर इसके लिए टैक्स लागू करने का ऐलान नहीं करती। इसलिए माना जा सकता हैं कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना एक तरह से लीगल हो गया है। मगर यह भी कहा गया है कि सरकार केवल केन्द्रीय बैंक यानि आरबीआई के द्वारा जारी की गई करेंसी को ही करेंसी का दर्जा देगी बाकी क्रिप्टोकरेंसी को कभी भी करेंसी का दर्जा नहीं मिलेगा यानि कि क्रिप्टोकरेंसी से भारत में खरीददारी, लेन-देन आदि नहीं होगा। हालांकि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं होगी।

KYC की होगी जरूरत

क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए हर किसी निदेशक को केवाईसी की आवश्यकता होगी। क्रिप्टोकरेंसी कारोबार में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसा करना आवश्यक था। इससे पहले क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए केवाईसी की आवश्यकता नहीं थी जिसके चलते निवेशकों की पहचान या पारदर्शिता ठीक ढंग से नहीं हो पा रही थी। अब हर किसी निवेशक को क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेड करने वाले प्लेटफार्म पर केवाईसी करनी जरूरी होगी।

RBI की होगी अपनी डिजिटल करेंसी

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपनी डिजिटल करेंसी होगी जो अधिक स्थिर व विश्वशनीय होगी। RBI अगले एक से डेढ़ साल में अपनी डिजिटल करेंसी लेकर आ सकती हैं। जिसके कारण कहा जा सकता हैं कि भारत भी डिजिटल करेंसी को लेकर सकारात्मक रूप अपनाना चाहता है।
हालांकि आरबीआई का डिजिटल रूपया किसी क्रिप्टोकरेंसी के विपरित पूर्ण पारदर्शिता के साथ आरबीआई के अगुवाई में रेगुलेट होंगा। यह किसी क्रिप्टोकरेंसी से बहुत अलग होगा व सभी लेन-देन के लिए स्वीकार भी किया जाएगा।
इसे देखते हुए भविष्य में बिटकॉइन व अन्य क्रिप्टोकरेंसी में निवेशकों द्वारा दिलचस्पी बनी रहेगी।

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निवेश पर कितना असर पड़ेगा?

क्रिप्टोकरेंसी आय को टैक्स स्लैब में आने पर क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में निवेशकों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा सकती हैं
भविष्य में बिटकॉइन जैसे क्रिप्टोकरेंसी की कीमत में बढ़ोतरी देखी जा सकती हैं। क्योंकि अब निवेशकों के मन में इस पर प्रतिबंध लगने का डर नहीं होगा।
वर्चुअल डिजिटल एसेट से की गई कमाई पर टैक्स लगाने व सेंट्रल बैंक द्वारा डिजिटल करेंसी लाने से भारत ने डिजिटल करेंसी को लेकर सकारात्मकता दिखाई है।
हालांकि सरकार की तरफ से ये भी कहा गया हैं कि करेंसी केवल वही होगी जिसे सेंट्रल बैंक द्वारा जारी किया गया हों। बाकी क्रिप्टोकरेंसी को कभी करेंसी के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

केवल एक देश ने अपनाया हैं बिटकॉइन को

दुनिया भर मे केवल एक ही देश (अल सल्वाडोर) हैं जिसने बिटकॉइन को वैध करेंसी के रूप में स्वीकार किया है। अन्यथा बाकी देशों में बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टोकरेंसी को वैध नहीं माना हैं। अल सल्वाडोर को बिटकॉइन को रेगुलर करने में बहुत सी चुनौतियां हैं जिसको देखते हुए अन्य देश क्रिप्टोकरेंसी को लीगल मानने से कतरा रहे हैं।

केन्द्रीय बैंक का नहीं है नियंत्रण

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लगभग सभी देशों के सामने ऐक ही समस्या है कि इसमें पारदर्शिता व नियंत्रण कैसे किया जाए। बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टोकरेंसी को रैगुलेट करने के लिए किसी भी सरकार या केन्द्रीय बैंक का कोई नियंत्रण नहीं है। या कहें कि क्रिप्टोकरेंसी डिसेंट्रालाइज्ड हैं। जिसके कारण इससे होने वाले ट्रांजेक्शन का रिकार्ड रख पाना मुश्किल हैं।

गैर-कानूनी क्यो माना जाता हैं?

लगभग सभी देश व केन्द्रीय बैंक क्रिप्टोकरेंसी को गैर-कानूनी इसलिए मानते हैं क्योंकि इसका रिकार्ड सरकार या केन्द्रीय बैंक के पास नहीं है। जिसके कारण इसे रेगूलेट करना मुश्किल हैं। इसके साथ ही इसकी कीमत में होने वाले उतार चढ़ाव भी चिंता का विषय बना हुआ है।

क्रिप्टोकरेंसी संबंधित FAQs

क्या भारत में क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध है?

नहीं, भारत सरकार की तरफ से ऐसा कोई भी नियम या कानून नहीं बनाया गया हैं जिसके आधार पर कह सके की क्रिप्टोकरेंसी भारत में प्रतिबंधित हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी लीगल हैं या नहीं?

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई कानून नहीं बना हैं जिसके आधार पर कहा जा सकें कि भारत मे क्रिप्टोकरेंसी लीगल हैं।
मगर क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय को टैक्स स्लैब में लेकर आना एक संकेत हो सकता है कि क्रिप्टोकरेंसी भारत मे निवेश के लिए लीगल हैं।

क्रिप्टोकरेंसी को रेगूलेट करना क्यो मुश्किल है?

लगभग सभी देशों के सामने क्रिप्टोकरेंसी को पारदर्शिता के साथ चलन मे लाने की चुनौती हैं। इसी वजह से क्रिप्टोकरेंसी का रिकाॅर्ड रख पाना थोड़ा मुश्किल है।

बिटकॉइन को किस देश ने वैध करेंसी माना हैं?

अभी तक केवल अल-सल्वाडोन ने बिटकॉइन को कानूनी तौर पर वैध या लीगल करेंसी के रूप में स्वीकार किया है। हालांकि अन्य देश क्रिप्टोकरेंसी पर गहनता से नजर बनाए हुए हैं।

अस्वीकरण / Disclaimers

पैसावालेडाटइन कभी भी किसी व्यक्ति को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए प्रेरित नहीं करता हैं।
सभी निवेशकों से अपील है कि वह अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए ही निवेश करें। भविष्य में होने वाले लाभ या हानि का जिम्मेदार पैसावालेडाॅटइन नही होगा।

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